सोशल मीडिया, AI और मनोवैज्ञानिक प्रभाव: एक चिंतन

सोशल मीडिया, AI और मनोवैज्ञानिक प्रभाव: एक चिंतन

आज के डिजिटल युग में, सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि यह प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे नकारात्मकता का अड्डा बनता जा रहा है? हाल के दिनों में यह देखा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नकारात्मक पोस्टों की भरमार हो गई है और सकारात्मक सामग्री की पहुंच (रीच) कम होती जा रही है। क्या यह मात्र एक संयोग है, या इसके पीछे कोई बड़ी योजना है ?
अति राजनीतिक चर्चा को हिन्दू जागरण समझने की भूल

अति राजनीतिक चर्चा को हिन्दू जागरण समझने की भूल

सोशल मीडिया के आगमन के साथ राजनीतिक जागरूकता और जानकारी में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। लोग हर घटना पर अपने विचार व्यक्त करने लगे। इसके परिणामस्वरूप राजनीति पर चर्चा करने और स्वयं को राजनीतिक विशेषज्ञ समझने की प्रवृत्ति बढ़ी।
अपराधियों के घर बुलडोजर चलाकर गिरा देना कोई बहुत संतोषजनक स्थिति नहीं है।

अपराधियों के घर बुलडोजर चलाकर गिरा देना कोई बहुत संतोषजनक स्थिति नहीं है।

आज जब अपराधी अपराध करते हैं, उन्हें पता है निर्णय होते होते पीढियां बीत जाएंगी, उन्हें इस बात का कोई भय नहीं है कि कानून का भी कोई रखवाला होता है।
बुलडोजर कार्यवाही केवल कुछ उत्साही जनों द्वारा अपराध की कमर तोड़ने के लिए अपनाई गई वैसी ही चतुर युक्ति है, जिस चतुराई का प्रयोग कर अदालतें अपराधी को बचाती रही है।